जयपुर संपादकीय

गुलाबी नगर में सुरक्षा का भाड़ा

संपादक की राय

जयपुर की सड़कें आजकल बड़ी अजीब हो गई हैं। आप एक कैब बुक करते हैं, हवाई अड्डे तक पहुँचने की उम्मीद में बैठते हैं, और एक ‘ऑफिस कैब’ का चालक ‘प्रकृति के बुलाव’ का बहाना बनाकर आपको जीवन भर का ऐसा सदमा दे जाता है, जिससे गुलाबी नगर की हर चमक फीकी पड़ जाती है। यह कोई गली का अनजान रिक्शा नहीं था, बल्कि एक पेशेवर सेवा थी, जिस पर विश्वास किया गया था।

विश्वास की इस ‘किराए’ वाली अर्थव्यवस्था में क्या हर यात्री सिर्फ़ एक संभावित शिकार है? एक शहर जो खुद को पर्यटन और मेहमानवाज़ी का केंद्र कहता है, वहाँ एक महिला को हवाई अड्डे तक जाने के लिए भी दरिंदों से जूझना पड़े, तो यह किस तरह की मेहमानवाज़ी है? क्या यह गुलाबी रंग सिर्फ़ पत्थरों पर चढ़ा है, या हमारी चेतना पर भी एक गुलाबी पर्दा डाल दिया गया है?

यह कहानी सिर्फ़ एक रात की काली घटना नहीं, यह उस व्यवस्था की सच्चाई है जहाँ ‘पृष्ठभूमि जाँच’ जैसे शब्द कागज़ों तक सिमट कर रह गए हैं। जब कोई चालक किसी प्रतिष्ठित ‘ऑफिस कैब’ का स्टीयरिंग संभालता है, तो एक अदृश्य अनुबंध होता है विश्वास का। वह अनुबंध एक ‘नेचर कॉल’ के बहाने पर तार-तार हो जाता है, और हम एक बार फिर उस खोखलेपन के सामने खड़े रह जाते हैं, जहाँ हर दावा एक मज़ाक बन जाता है।

फिर वही पुलिस की तत्परता, वही बयान, वही गिरफ्तारी, और फिर वही अगले शिकार का इंतज़ार। यह एक रस्म बन गई है। एक अपराध होता है, हंगामा मचता है, कुछ दिन सुर्ख़ियों में रहता है, और फिर कोई नई घटना उस पुरानी टीस को दबा देती है। शहर मुस्कुराता रहता है, पर्यटक आते-जाते रहते हैं, और भीतर ही भीतर वह घाव रिसता रहता है।

सवाल सिर्फ़ उस चालक का नहीं, सवाल उस हर व्यवस्था का है जो सुरक्षा का झाँसा देकर चलती है। क्या हमारे ऐप-आधारित यातायात समाधान सिर्फ़ सुविधा बेचते हैं, या सुरक्षा की भी कोई गारंटी देते हैं? क्या यह सिर्फ़ एक ‘बहाने’ की बात है, या यह हमारी पुरुषवादी मानसिकता का एक और वीभत्स चेहरा है जो मौका मिलते ही सामने आ जाता है?

हमने ‘स्मार्ट सिटी’ का सपना देखा था। क्या उस सपने में महिलाओं की सुरक्षा सिर्फ़ एक ‘फीचर’ बनकर रह जाएगी जिसे कभी ‘अपडेट’ नहीं किया जाएगा? या यह वही पुराना शहर है, जहाँ कुछ भी नहीं बदलता, बस नाम और तकनीक बदल जाती है, और दरिंदगी का रंग हमेशा गहरा रहता है?

कोई बताएगा, उस महिला ने हवाई अड्डे तक पहुँचने के लिए जो किराया चुकाया, उसमें उसके टूटे हुए भरोसे की कीमत भी शामिल थी क्या? यह शहर कब अपनी इस सचाई से आंखें मिलाएगा, या गुलाबी रंग के नशे में ही सब कुछ भुला देगा?