जयपुर संपादकीय

हिट-एंड-रन: कानून का नया नुस्खा

संपादक की राय

जयपुर की सड़कों पर, जहां हर दिन किसी न किसी की तकदीर पलटती है, एक नई कहानी गढ़ी गई है। एक ‘चिकित्सक’ की गाड़ी ने किसी को टक्कर मारी, यह तो पुरानी खबर है। नई बात तो यह है कि अब इस मामले को महज़ हिट-एंड-रन नहीं, बल्कि ‘गैर इरादतन हत्या के प्रयास’ में बदल दिया गया है। वाह! पुलिसिया फ़ाइल में यह कैसा कायाकल्प है? क्या अब कानून भी अपने हिसाब से मरीज़ की हालत बिगाड़ेगा या सुधारेगा?

हमारी पुलिस, जो अक्सर गुम हुई बकरी ढूंढने या दो पड़ोसियों का झगड़ा निपटाने में सालों लगा देती है, अचानक इतनी सूक्ष्मदर्शी हो गई है कि वह एक सड़क हादसे में ‘इरादे’ की परतें उधेड़ने लगी है। ‘गैर इरादतन हत्या का प्रयास’—यह एक ऐसा कानूनी मुहावरा है, जिसके मायने समझने में अच्छे-अच्छे वकीलों के पसीने छूट जाते हैं। लेकिन यहां, एक ही झटके में, एक स्पष्ट मामले का चरित्र बदल दिया गया।

गली-मोहल्लों में, जहां एक सामान्य आदमी की साइकिल भी किसी को छू भर जाए तो उसे घंटों थाने में गिड़गिड़ाना पड़ता है, वहां ‘कुछ ख़ास’ लोगों के लिए कानून की किताबें पलटकर नई परिभाषाएं गढ़ी जाती हैं। क्या यह ‘चिकित्सक’ वर्ग का सम्मान है, या न्याय की तराजू पर किसी और अदृश्य शक्ति का दबाव?

पुलिस की यह ‘गहन’ जांच, जिसने एक सीधे-सादे अपराध को दार्शनिक बहस में बदल दिया, अपने आप में किसी पीएचडी से कम नहीं। अब तक तो हम यही समझते थे कि भागने वाला अपराधी होता है; अब पता चला कि भागने वाला शायद ‘इरादे’ की अनुपस्थिति सिद्ध कर रहा होता है। क्या यह हमारी दंड संहिता का नया, उदारवादी संस्करण है?

गुलाबी नगर की दोहरी ज़िंदगी का यह एक और शानदार उदाहरण है। एक तरफ़ कड़ी चेतावनी कि कानून अपना काम करेगा, दूसरी तरफ़ गुपचुप तरीके से धाराओं में बदलाव, ताकि ‘सही’ व्यक्ति बच जाए। यह केवल एक कागज़ी हेरफेर नहीं, यह जनता के विश्वास पर एक सुनियोजित वार है।

जब न्याय को परोसने वाले खुद धाराओं से खेलते हैं, तो आम आदमी को यह संदेश साफ जाता है कि कानून की आंखें तो खुली हैं, पर उनमें पट्टी शायद जानबूझकर बांधी गई है। वह पट्टी जो सिर्फ ‘कुछ’ को बचाने के लिए है।

तो क्या अब हर हिट-एंड-रन मामले में पुलिस पहले गाड़ी चलाने वाले का बायोडाटा चेक करेगी, फिर तय करेगी कि चोट कितनी गहरी है और कानून की धारा कितनी हल्की? इस नई ‘चिकित्सा’ के बाद, न्याय के आईसीयू में कौन बचेगा, और कौन नहीं, यह वक्त बताएगा।