जयपुर संपादकीय — 1 September 2026
जयपुर: बिजली गुल, भविष्य भी गुल
संपादक की राय
गुलाबी नगर, जिसकी पहचान अब सिर्फ़ दिखावे और वादों की पोल-खोल तक सिमट गई है, एक बार फिर अपने उन बेटों और बेटियों को अँधेरे में धकेलने पर आमादा है, जिनके हाथों में कल का हिंदुस्तान थामने की बात की जाती है। जब देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं – पहले NEET-PG, फिर AIIMS CRE – के केंद्र जयपुर में एक ही जगह पर, एक ही वजह से, बार-बार बत्ती गुल हो जाती है, तो सवाल उठता है कि हम किस भविष्य की बात कर रहे हैं? क्या यह सिर्फ़ एक बिजली कटौती है, या हमारे सिस्टम की धड़कन ही रुक गई है?
यह कोई एक दिन की बात नहीं, न किसी अचानक हुई तकनीकी खराबी का मामला। यह तीसरा मौका है जब छात्रों का भविष्य बिजली के एक झटके से अंधेरे में डूब गया। वही परीक्षा केंद्र, वही शहर, और वही बहाना – ‘स्थानीय विद्युत समस्या’। क्या जयपुर की प्रशासन व्यवस्था और बिजली विभाग इतना भी सुनिश्चित नहीं कर सकता कि कम से कम उन कुछ घंटों के लिए तो बिजली का वादा निभाया जाए जब हज़ारों जिंदगियों की दिशा तय होनी होती है? या शायद छात्रों की किस्मत में ही यह ‘स्थानीय समस्या’ लिख दी गई है?
परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाएँ, जैसे TCS iON, अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए इसे ‘स्थानीय विद्युत समस्या’ बताकर किनारा कर लेती हैं। यह तर्क अपने आप में हास्यास्पद है। जब एक ही केंद्र पर बार-बार यही ‘स्थानीय’ समस्या दुहराई जाए, तो यह स्थानीय नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता और अक्षमता का वैश्विक प्रमाण बन जाता है। क्या उनके पास कोई आपातकालीन व्यवस्था नहीं? या फिर छात्रों का समय, मेहनत और पैसा, उनके लिए सिर्फ़ आँकड़े हैं, भावनाएँ नहीं?
उन हज़ारों छात्रों की कल्पना कीजिए, जो महीनों की नींद, परिवार की उम्मीदों और अपनी पूरी जमा-पूंजी दांव पर लगाकर इस इम्तिहान के लिए आते हैं। दूर-दराज़ के गाँवों से जयपुर पहुँचते हैं, किराए के कमरों में रहते हैं, और फिर एक अदद बिजली की कमी के चलते उनके सपने तार-तार हो जाते हैं। यह केवल एक परीक्षा रद्द होना नहीं, यह आत्मविश्वास का टूटना है, यह व्यवस्था पर भरोसे का मरना है। यह बताती है कि हम अपने युवाओं को कितना महत्व देते हैं।
हम उस जयपुर की बात करते हैं, जिसे ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने का सपना दिखाया जाता है। गुलाबी पत्थरों और भव्य हवेलियों के पीछे, क्या यही है हमारी आधुनिकता का सच? वह शहर जो पर्यटकों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ता, उसी शहर में परीक्षा देने आए बच्चे अँधेरे में भविष्य टटोलते रह जाते हैं। यह कैसी विडंबना है कि जहाँ उत्सवों और आयोजनों के लिए बिजली की कोई कमी नहीं होती, वहीं शिक्षा के मंदिर में यह गुल हो जाती है।
यह केवल बिजली विभाग या परीक्षा कराने वाली एजेंसी की चूक नहीं, यह समूची प्रशासनिक मशीनरी का सामूहिक फेलियर है। सरकार के वे वादे कहाँ गए, जो हर मंच से युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की बात करते हैं? क्या कोई मंत्री या अधिकारी यह बताने की ज़हमत उठाएगा कि इस ‘स्थानीय समस्या’ का स्थायी समाधान कब निकलेगा? या हम मान लें कि जयपुर में छात्रों का भविष्य हमेशा ऐसे ही ‘स्थानीय’ बिजली गुल होने के भेंट चढ़ता रहेगा?
सवाल सिर्फ़ परीक्षा के दोबारा होने का नहीं है। सवाल यह है कि इस मानसिक प्रताड़ना, आर्थिक नुकसान और अनिश्चितता का हिसाब कौन देगा? क्या हमारे पास कोई जवाब है कि यह तीसरी बार हुई घटना, जो जयपुर के माथे पर कलंक है, चौथी बार नहीं होगी? या फिर हम इंतज़ार करें कि अगली बार जब कोई और बड़ा इम्तिहान होगा, तो फिर से वही पुराना नाटक दोहराया जाएगा – बत्ती गुल, परीक्षा रद्द, और छात्रों के चेहरे पर गहरी उदासी?