जयपुर संपादकीय — 2 September 2026
बिजली बत्ती गुल, भविष्य के डॉक्टर फेल
संपादक की राय
AIIMS की परीक्षा रद्द। खबर सुनते ही पहला ख्याल आता है, क्या प्रश्नपत्र लीक हो गया? या नकल का कोई नया जुगाड़? लेकिन नहीं जनाब, इस बार कारण कुछ और ही ‘आधुनिक’ है – बिजली गुल। गुलाबी नगरी की शान देखिए, जहां देश के भविष्य के डॉक्टर बनाने की परीक्षा में रोशनी ही नहीं मिली।
‘डिजिटल इंडिया’ का नारा हर चौराहे पर गूंजता है, ‘स्मार्ट सिटी’ के पोस्टर दीवारों पर चिपके हैं। लेकिन जब AIIMS जैसी प्रतिष्ठित संस्था की परीक्षा के केंद्रों पर मामूली बिजली की आपूर्ति भी सुनिश्चित नहीं की जा सकती, तो फिर किस ‘स्मार्टनेस’ की बात करते हैं हम? क्या ‘आत्मनिर्भर भारत’ का मतलब अब मोमबत्ती या लालटेन के भरोसे परीक्षा देना होगा?
सैकड़ों छात्र, महीनों की तपस्या, माता-पिता की उम्मीदें – सब एक झटके में ‘आउट ऑफ सिलेबस’। और नतीजा? एक नई तारीख। न कोई ज़िम्मेदारी लेगा, न किसी पर तलवार लटकेगी। बस, ‘असुविधा के लिए खेद है’ की रटी-रटाई टेप फिर से बजा दी जाएगी। यह कौन सी व्यवस्था है, जहाँ गलती करने वाला नहीं, बल्कि भुगतने वाला ही बार-बार परीक्षा देता है?
यह सिर्फ़ दो परीक्षा केंद्रों की बात नहीं है, यह उस पूरे सिस्टम की बानगी है जो ऊपरी चमक-दमक में तो अव्वल है, पर बुनियादी चीज़ों में दम तोड़ देता है। गर्मियों में जब कूलर-एसी चलते हैं, तब बिजली गुल होना आम बात है। लेकिन जब छात्रों के भविष्य का सवाल हो, तब भी यह ‘आम’ कैसे रह सकता है? क्या हमें अपनी प्राथमिकताएं फिर से तय करने की ज़रूरत नहीं, या ‘सब चलता है’ की घुट्टी हमने इतनी पी ली है कि अब कुछ महसूस ही नहीं होता?
विडंबना देखिए, जिन छात्रों को कल देश की ‘स्वास्थ्य व्यवस्था’ संभालनी है, उन्हें आज खुद ‘व्यवस्था’ के बीमार होने का सीधा अनुभव मिल रहा है। क्या यही है वह पहला पाठ जो हम अपने भावी चिकित्सकों को पढ़ाना चाहते हैं? कि कितनी भी तैयारी कर लो, अंततः सिस्टम की मनमानी ही चलेगी?
तो क्या अब हर परीक्षा केंद्र पर जनरेटर, इन्वर्टर और यूपीएस की उपलब्धता भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनेगी? या फिर हम उम्मीद करें कि अगली बार जब कोई बड़ी परीक्षा हो, तो कम से कम बिजली विभाग उस दिन हड़ताल पर न जाए? जयपुर, तुम्हारी गुलाबी आभा के पीछे यह अंधेरा कब तक छुपा रहेगा?